हाईटेक पूजा

एक नवीनतम और अनोखा अनुभव, संस्मरण के रूप में पोस्ट करने की इच्छा को रोक पाना कठिन हो रहा है मेरे लिए। करीब एक महीना पहले की घटना है। मेरा लड़का चंचल, जो कि आजकल बेंगलोर में शिक्षार्थी है और अपने बड़े भाई सदृश वसंत के साथ रहता है, का फोन आया कि वसंत भैया सत्यनारायण प्रभु की पूजा करवाना चाहते हैं, लेकिन यहाँ पर पण्डित जी कम से कम ११०० रु० दक्षिणा के रूप में माँग कर रहे हैं। पूजा की सारी तैयारियाँ हो चुकीं हैं, लेकिन इतनी रकम दक्षिणा के रूप में देना संभव नहीं है। अब क्या करें?

मैं भी सोचने को विवश हो गया। फिर मैंने हँसते हुए मजाक में कहा – क्या फोन पर मैं जमशेदपुर से ही पूजा करा दूँ? मजे की बात है कि बच्चे इसके लिए तैयार हो गए। मैं भी आफिस से आकर पुनः बेंगलोर फोन लगाया। उनलोगों को सारी बातें समझायी। मोबाइल फोन वालों की दुनिया भी कुछ अलग होती है। कई प्लान ऐेसे हैं जिसमें अनलिमिटेड फ्री बातचीत की जा सकती है। ठीक इसी प्रकार की किसी योजना के तहत इन्डिकोम टू इन्डिकोम फ्री बातचीत हो सकती थी। मैंने भी सोच लिया कि अब यह ऐतिहासिक पूजा हाईटेक का इस्तेमाल करके करवा ही दूँ।

घर आकर पूजा करवाने के भाव से खुद को तैयार किया। सामने पूजा वाली पुस्तक को रखकर फोन लगाया और बेंगलोर वाले फोन का स्पीकर आन करवा दिया। मंत्रोच्चार के साथ पूजा शुरू हुई। मैं जो भी मंत्र पढ़वाता उधर से भी रिपीट होता था जिसे मैं आसानी से सुन भी सकता था। बीच बीच में उधर से मत्रोच्चार की गलतियों को भी सुधार करवाता गया। अन्ततोगत्वा पूजा की कार्यवाही कथा सहित रीति रिवाज के अनुसार समाप्त हुई। बच्चे काफी खुश थे, साथ में मैं भी कि नये तकनीक का इस्तेमाल करके एक नये तरीके से पूजा करवाने का एक छोटा प्रयास तो किया। मैं नहीं जानता कि यह कितना अच्छा या बुरा काम हुआ? लेकिन खुशी इस बात की है कि तथाकथित ऐसे पण्डितों का मोनोपोली तोड़ने की दिशा में कुछ तो किया।

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7 टिप्पणियाँ

  1. Vivek Rastogi said,

    सितम्बर 20, 2009 at 3:36 पूर्वाह्न

    बधाई आपको आपने तकनीक का सहारा लेकर एक दूरस्थ स्थान पर पूजा करवाई।

  2. M VERMA said,

    सितम्बर 20, 2009 at 4:08 पूर्वाह्न

    चलो पूजा हाईटेक हो गयी

  3. सुशील कुमार said,

    सितम्बर 20, 2009 at 4:16 पूर्वाह्न

    ठीक किया आपने श्यामल भाई। इससे एक ओर आपका काम भी सरा,दूसरी ओर पंडित की मनमानी पर अंकुश भी लगा।

  4. संगीता पुरी said,

    सितम्बर 20, 2009 at 4:35 पूर्वाह्न

    हाइटेक पूजा के सहारे बडे बडे मंदिरों के पुजारी आज दक्षिणा के रूम में बडी इकट्ठा करने को गलत कहा जा सकता है .. पर मितव्‍ययिता के ख्‍याल से आपके द्वारा इस प्रकार की गयी पूजा की सराहना की जानी चाहिए .. सचमुच बहुत बढिया संस्‍मरण रहा !!

  5. Raju said,

    सितम्बर 20, 2009 at 5:49 पूर्वाह्न

    धन्य है. आप जैसों की दम पर ही यह देश चल रहा है.

  6. ashwin said,

    सितम्बर 20, 2009 at 6:41 पूर्वाह्न

    टेली पूजा के लिए बधाई….. आगे भी करते रहे, तकनीकी का उपयोग तो आपने बहुत सही किया है और पैसे बचा लिए वो अलग 🙂 …….

  7. Murari Pareek said,

    सितम्बर 21, 2009 at 9:35 पूर्वाह्न

    वाह तब तो फेरे भी टाटा इंडिकॉम से हो सकते हैं!!


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