क्योंकि हम ढीठ जो हैं

मई २०११ अंक
सबके मुख पर है कालिख किसको कौन लजाये रे!’ लेकिन हम सबके साथ-साथ अपने को भी लजा रहे हैं, फिर भी हमें लाज नहीं आती। हम पूरी तरह निर्लज्ज हो चुके हैं।
जब से मैंने होश संभाला; तब से ही भ्रष्टाचार के रोने-गाने की आवाज मेरे कानो में घुलती रही है। संभवतः आपके साथ भी ऐसा ही होता हो।  आपने कभी इस पर विचार किया है कि ऐसा क्यों होता है? शायद इसलिए कि हमारा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सिस्टम पटरी पर ठीक से फिट नहीं किया गया है। जिस दिन इसे फिट कर दिया जायेगा, उसी दिन सब ठीक हो जायेगा। लेकिन इसे ठीक करेगा कौन? क्योंकि सब के मुख पर तो कालिख पुता हुआ है, कौन आयेगा सामने इसे ठीक करने को? आप को विश्वास नहीं होता तो आप सौ व्यक्ति को एक जगह बुलाकर भ्रष्टाचार पर गोष्ठी करवा लीजिए, सौ के सौ व्यक्ति तरह से तरह से भ्रष्टाचार पर आख्यान-व्याख्यान देता हुआ चला जायेगा, लेकिन एक भी व्यक्ति उसमें से ऐसा नहीं सामने आयेगा, जो अपने को पहला भ्रष्ट व्यक्ति साबित करे। तो आखिर भ्रष्टाचार करता कौन है? इस प्रश्न का उत्तर कौन देगा? इसका उत्तर कैसे मिलेगा? लगता है सृष्टि की समाप्ति तक इस यक्ष प्रश्न का उत्तर हम नहीं ढूंढ़ पायेंगे। क्योंकि हम ढीठ जो हैं।  Read the rest of this entry »
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ग़ज़ल

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बन जा मेरी मात यशोदा

काफी दिन पहले मेरी धर्मपत्‍नी द्वारा लिखित एक भजन आज आपको पढा रहा हूं आशा है आप सभी को पसंद आएगी। यह भजन मेरी पत्‍नी ने जन्‍माष्‍टमी पर लिखा था लेकिन कुछ व्‍यस्‍तता के चलते आज इसे आप सभी को पढवा रहा हूं

तू बन जा मेरी मात यशोदा
मैं कान्‍हा बन जाऊं
जा यमुना के तीरे मां
बंशी मधुर बजाऊं
इक छोटा सा बाग लगा दे
जहां झूमूं नाचू गाऊं
घर-घर जाकर माखन मिश्री
चुरा चुरा के खाऊं
इक छोटी सी राधा लादे
जिसके संग रास रचाऊं
तू ढूंढे मुझे वन उपवन
मैं पत्‍तों में छिप जाऊं
तू बन जा मेरी मात यशोदा
मैं कान्‍हा बन जाऊं

चुनाव आयोग के कान खड़े होने चाहिए.

पिछले शुक्रवार से, जब से हरियाणा विधान सभा भंग हुई है, कामचलाऊ सरकार ने अपने सूचना निदेशालय की थैलियों का मुंह खोल दिया है. हर टी वी चैनल पर चंडीगढ़ से चाइना तक चौबीसों घंटे राज्य सरकार की उपलब्धियों के विज्ञापन, सरकारी खर्चे पर दिखाए जा रहे हैं.

चुनाव आयोग, चुनावों की तारिख तय होने के बाद से ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगता है. लेकिन सवाल ये है कि जब विधान सभा चुनावों के लिए ही भंग की गयी है तो ये कहाँ तक उचित है कि जनता का करोडों रुपया यूं किसी पार्टी विशेष की छवि बनाने पर स्वाहा किया जाए. और वह भी तब, जब दूसरी ओर देश सूखे की त्रासदी झेल रहा हो.

चुनाव आयोग को चाहिए कि सरकार गिरने / विधान सभा (लोक सभा) भंग के साथ ही इस तरह के सरकारी खर्च पर किये जाने वाले प्रचार पर बिना और देर किये प्रतिबन्ध का प्रावधान करे.

-काजल कुमार

माइकल जैक्सन की मौत पर रहस्य



कैसे मौत हुई इस बारे में रहस्य बना हुआ है.
पॉप किंग माइकल जैक्सन की अचानक मौत के बाद इस बारे में अटकलें जारी हैं कि आख़िर किस वजह से उनकी जान गई. यूं तो उन्हें बेहोशी और सांस लेने में दिक्कत की वजह से अस्पताल लाया गया, लेकिन उनके डॉक्टरों पर भी अंगुली उठ रही है.

माइकल जैक्सन ने गुरुवार को लॉस एंजलिस के एक अस्पताल में दम तोड़ा जहां जहां उन्हें दिल का तगड़ा दौरा पड़ने के बाद लाया गया था. हालांकि अभी उनकी मौत की असल वजह का पता नहीं चल पाया है. जैक्सन परिवार के प्रवक्ता ब्रिएन ऑक्समन ने कहा, पूरा परिवार माइकल की सेहत को लेकर चिंतित था और महीनों से उनकी देखभाल की जा रही थी लेकिन सब बेकार साबित हुई.
शुक्रवार को उनके शव का परीक्षण होना है, हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि मौत की सही सही वजह पता करने में हफ़्ते लग सकते हैं. इसके लिए टोक्सिकोलॉजी टेस्ट भी किए जाएंगे जिनसे पता चलेगा कि क्या जैक्सन के शरीर में कोई नशीली दवा, अल्कोहल या फिर डॉक्टर की बताई दवाएं थी.
Bildunterschrift: मुश्किलों से भरा जीवन दूसरी तरफ़ जैक्सन के पूर्व प्रॉड्यूसर और मित्र टैरेक बेन अम्मार ने उनके डॉक्टरों पर ऊंगली उठाई है. वह कहते हैं, जैक्सन के मामले में अपराधी उनके वे डॉक्टर हैं जिन्होंने पूरे करियर में उनका इलाज किया और उनके चेहरे को बिगाड़ा. उन्हें दर्द कम करने के लिए दवाएं देते रहे. ट्यूनिशियाई मूल के बेन अम्मार का मानना है कि जैक्सन की मौत दिल के दौरे से हुई है. उनके मुताबिक़ जैक्सन लगातार नींद की गोलियां लेते थे. इसके अलावा और कई तरह की दवाएं भी वे लेते रहे, लेकिन बेन अम्मार यह साफ़ करते हैं कि उन्होंने कभी जैक्सन को कभी ग़ैर क़ानूनी दवाएं लेते नहीं देखा.
लॉस एंजिलिस टाइम्स से पहले टीएमज़ेड नाम की मनोरंजन वेबसाइट ने भी इंटरनेट पर माइकल जैक्सन की मौत हो जाने की पुष्टि की. पॉप किंग के नाम से मशहूर जैक्सन के ‘थ्रिलर’ और ‘बिली जीन’ जैसे अलबमों ने संगीत की दुनिया के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. माइकल जैक्सन के जादुई डांस की पूरी दुनिया दीवानी हो गई और उनके चाहने वाले कई कई मौक़ों पर इस डांस की नक़ल करते हैं. वह अगले महीने से लंदन में एक बार फिर एक विशाल टूर शुरू करने वाले थे.
माइकल जैक्सन अगले महीने से लंदन में एक विशाल कंसर्ट शुरू करने वाले थे. जुलाई की 13 तारीख़ से शुरू होने वाला यह कंसर्ट अगले साल मार्च तक चलना था. इस सिलसिले में जैक्सन पिछले दो महीनों से लॉस एंजिलिस में रिहर्सल कर रहे थे. उन्हें कुल 50 कंसर्ट करने थे और इन सभी के टिकट पूरी तरह बिक चुके हैं.
बताया जाता है कि माइकल जैक्सन के कुल 75 करोड़ अलबम बिके हैं और उन्हें 13 ग्रैमी अवार्ड मिल चुके हैं, जिसे संगीत का सबसे बड़ा पुरस्कार समझा जाता है. माइकल जैक्सन की ज़िन्दगी में शोहरत के साथ कई बदनामियां भी आईं. क़रीब चार साल पहले एक बच्चे के यौन दुराचार के मामले में बरी होने के बाद से वह अलग थलग जीवन बिता रहे थे. हाल के दिनों में माइकल जैक्सन की तबीयत बहुत ख़राब चल रही थी.

सभी प्रिय ब्लॉगर साथियों से अनुरोध है कि दृष्टिपात पत्रिका, हिंदी मासिक के लिए कृषि विशेषांक जुलाई २००९ में प्रकाशनार्थ
सामग्री निम्न पते पर प्रेषित करें. तथा डाक से नमूने की प्रति मंगाने केलिए अपना डाक का पता भी ईमेल करें जून अंक कल तक प्रकाशित हो जायेगी
सहयोग की अपेक्षा के साथ
सादर
अरुण कुमार झा
प्रधान संपादक
जे. एफ. 8/9 हरमू कोलोनी , रांची
drishtipathindi@gmail.com
http://drishtipat.com

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ये घर न ख्वाबों का है न कोई ख्वाहिशों का

ये घर है विश्वाश का. ये घर है प्रेम और वलिदान का. ये घर है क्षमा और दया का. ये घर है भाईचारगी और सौहार्द्र का. ये घर है त्याग औरतपस्या का. ये घर है. यहाँ आपका वागत है. लेकिन एक अनुरोध यहाँ कुछ लेकर कृपया न आयें. यहाँ इस घर में नफरत की कोई गुजाईश नहीं. इस घर में दोहरे चरित्र की आवश्यकता नहीं. इस घर में सिर्फ देने का रिवाज है लेने का नहीं. इस घर से सिर्फ मिल सकता है. बाहर से कुछ लाने की आवश्यकता नहीं. यदि यह सब आप कर सकेंगे/सकेंगी, तो यह घर आप का तहे दिल से स्वागत करता है. आप एक बार यहाँ प्रवेश करेंगे/करेंगी तो फिर संभव नहीं है आपके लिए यहाँ से चला जाना क्यों कि यहाँ कोई शर्त नहीं रखी जाती है. यहाँ दिखाबे का ख्वाब नहीं होता, यहाँ न किसी प्रकार का बनावटी ख्याल पलते हैं, फिर ख्वाहिशें कैसी? इस लिए आप को सब कुछ छोड़ कर ही इस घर में प्रवेश करना होगा. पहले पात्रता आपको तैय करनी पड़ेगी कि इस योग्य आप है। या नहीं! यह भी आप पर स्यवं निर्णय छोड़ा गया है. फिर समय भी है, जैसा भी निर्णय करें. आप का हमेशा स्वागत है. ये घर सिर्फ सच्चा प्रेम का है. यहाँ तेरा मेरा कुछ नहीं है. यहाँ न बुढापा है, न जवानी है. यहाँ उम्र की कोई बंदिश नहीं है. क्योंकि यह सब कुछ दिनों में समाप्त होने वाली चीजें है. जिस पर आप और मेरा कोई बस नहीं, फिर इस पर इतराना कैसा?
आइए आपका स्वागत है,
न कोई कहानी लेकर आइए न ही कोई कविता लेकर.
यहाँ आपकी इन चीजों की कोई अहमियत नहीं है.
क्योंकि आपकी अपना कुछ भी नहीं है. यह सब आप के गलत ख्याल का अहंकार है, इसे छो़ड़ कर आइए. आप का स्वागत है.
-देह की लकीर
टूटता जुड़ता हुआ
इसका आयाम,
कभी सिहरन भरा दर्द,
कभी घृणा का अहसास.
फिर भी ऐसी यह लकीर,
जिस पर मानव चलने को
आतुर,
रोज वही सज-धज
वही सुवह व शाम
बाकी सब धुआँ धुआँ.
तो फिर इस धुएँ की धुंध से निकल कर इस घर में आ जाइए. आप का स्वागत है. ये आप का ही घर है. तो आ जाइए न!!
अरुण कुमार झा

घर में आप सभी का हार्दिक-हार्दिक स्वागत है, इस घर से न कोई ख्वाइश है न ख्वाब हैं न ही कोई ख्याल है .
इस घर में सब कोई मिलकर रह ले, इतना सबसे अनुरोध हैं, इस घर में सबकुछ हो जरूर, लेकिन घृणा. नफरत. लालच, सिर्फ न हो. यह भी अनुरोध है. यहाँ न कुछ तेरा है न मेरा है. रेल की सवारी हैं हम सब स्टेशन आने पर उतर जाना है- अलग-अलग अपना स्टेशन है, तो चले अपने घर में ) आइये आपका तहे दिल से स्वागत है.
अरुण कुमरा झा

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